विटामिन ए और हमारी आखें No ratings yet.

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आखें स्वस्थ रहे और उनकी रोशनी बनी रहे इसके लिए जरूरी है कि हमारे शरीर में विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में हो। विश्व में एक तिहार्इ बच्चों में विटामिन ए की कमी है। विटामिन ‘ए की कमी से कोर्निया या बीच का काला हिस्सा सूखा और धुंधला हो जाता है। इसके बाद कोर्निया मुलायम हो जाती है और सतह पर घाव जख्म हो जाते हैं जिससे अन्त में अन्धापन होता है। आखों का सफेद भाग अपनी चमक खो देता है वह फीका, सूखा, खुरदुरा तथा झुर्रीदार दिखार्इ पड़ता है। आख की पुतली के सफेद हिस्से पर खुरदुरे उभरे हुए चकत्ते दिखार्इ देने लगते हैं, जिसे बाइटाटस कहते है। आखों की सफेदी के उपर की पर्त सूख जाती है और उसमें झुर्रियां तथा मोटापन आ जाता है। कम रोशनी और रात में कम दिखार्इ पड़ता है, जिसे रतौंधी के नाम से भी जाना जाता है। विटामिन ‘ए की कमी से दोनों आंखें प्रभावित होती हैं।

विटामिन ए वसा में घुलनशील विटामिन है जो कि मुख्यत: दो रूपों में पाया जाता हैं। एक रेटिनायड जो दूध-दही, वसा आदि में और दूसरा कैरोटिनायड जो कि हरी पत्तेदार सबिजयों, फल आदि में पाया जाता है। विटामिन ए को रेटिनाल भी कहते है, यह रेटिना में पिग्मेंटस पैदा करता है। विटामिन ए हमारी आखों की रोशनी को बनाए रखने में मदद करता है और साथ ही साथ कम प्रकाश में भी वस्तुओं के देखने में सहायक होता है।

किसी भी अवस्था में विटामिन ए की कमी का पता लगने पर इसका इलाज करना बहुत जरूरी हो जाता है। स्वस्थ रहने के लिए दोनों रूपों का सेवन करना चाहिए।

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विटामिन ए की कमी से बचाव

विटामिन ए हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे चौलार्इ, चने, मेथी, पालक, बथुआ, बन्दगोभी, पालक, गाजर, कददू, ब्रोकली, फल जैसे पपीता, आम आदि में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह अंडे, मांस, दूध, पनीर, क्रमी, मछली आदि में भी पाया जाता है लेकिन इनमें सैचुरेटेड फैट, कोलेस्टराल भी काफी मात्रा में होता है। बच्चा जब 9 माह का हो जाय तो उसे 6 – 6 महीने बाद कम से कम 5 बार विटामिन ‘ए की खुराक जरूर दें। अगर अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो यह हानिकारक सिद्ध होता है।

चेतावनी

विटामिन ए को सही मात्रा में देना चाहिए, इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि मात्रा देने में कम से कम 6 महीने का अंतर जरूर होना चाहिए, ज्यादा देने से उलिटया होती है और कभी – कभी तो यह मसितष्क पर भी असर करता है।

विटामिन ‘ए की कमी से होने वाली समस्याओं को रोका जा सकता है। सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में विटामिन ‘ए की रोग निरोधक खुराक नि:शुल्क प्रदान की जाती है। इस सुविधा का लाभ उठाएं और बाल्यावस्था में होने वाली दृषिटहीनता से बच्चो को बचायें।

 

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