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हमारे देश  में लगभग 50 लाख व्यकित कार्निया की खराबी के कारण दृष्टिटहीनों का जीवन जीने के लिए मजबूर है।

कार्निया

कार्निया आँख के काले भाग के सामने स्पष्‍ट शीशे के समान पारदर्शी परत है जैसे किसी घड़ी के सामने का कांच। कार्निया आख पर पड़ने वाली रोशनी की किरणों केंद्रित या फोकस करने का काम करता है। इसकी पारदर्शिता नजर के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

ज्यादातर मामलों में कार्निया आँखों में संक्रमण, चोट लगने या बचपन में पोषण, विटामिन ए की कमी के कारण खराब होता है।

कार्निया खराब होने के कारण दृष्टिहीन हुए व्‍यक्ति की दृष्टि नेत्रदान द्वारा ही वापस आ सकती है। खराब कार्निया का एक मात्र विकल्प नेत्रदान से प्राप्त कार्निया है।

नेत्रदान

नेत्रदान में मृत्यु के बाद आँखों को नेत्रबैंक को दान किया जाता है जहां दो दृष्टिहीनों को नेत्रदान से प्राप्त कार्निया प्रत्यारोपित कर नयी दृष्टि दी जाती है।

कार्निया प्रत्यारोपण

कार्निया खराब होने के कारण दृष्टिहीन हुए व्यकित का कार्निया आपरेशन द्वारा नेत्रदान में प्राप्त कार्निया से बदले जाने की प्रक्रिया को कार्निया प्रत्यारोपण कहते है। साफ, स्वच्छ कार्निया केवल नेत्रदान द्वारा ही प्राप्त हो सकता है।

प्राप्त कार्निया का आर्इ बैंक में विश्‍लेषण कर फिर विषेशज्ञ के पास भेज दिया जाता है। कार्निया विशेषज्ञ कार्निया की गुणवत्ता के अनुसार उसे मरीज में प्रत्यारोपित करते है। इस शल्य क्रिया को नेत्रदान के 48 से 72 घंटे में पूर्ण करना होता है। अब कार्निया प्रत्यारोपण की नर्इ विधि से सूक्ष्म एवं जटिल प्रक्रिया द्वारा अनेक परिसिथतियों में बेहतर रोशनी प्रदान की जा सकती है।

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कौन कर सकता है?

नेत्रदान मृत्यु के बाद ही संभव है, किन्तु इसका निश्‍चय जीवन के दौरान किया जा सकता है। व्यकित की मृत्यु के पश्‍चात निकट परिजन भी इसका निर्णय ले सकते है। ऐसे लोग जो देख सकते है नेत्रदान कर सकते है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें मधुमेह, ब्लड प्रेशर है या वो मोतियाबिंद या अन्य कोर्इ आँख का आपरेशन करा चुके है या उनकी आँखे कमजोर है, चश्‍मा पहनते है। किसी भी उम्र के लोग यदि उन्हें दिखार्इ दे रहा है तो  नेत्रदान कर सकते है।

अज्ञात कारणों, एडस, हिपेटाइटिस, रेबीज एवं सैपिटसीमिया जैसे संक्रमण के कारण मरने वाले व्यकित की आखें उपयोग में नहीं ली जा सकती हैं।

कैसे किया जा सकता है?

मृत्यु के पश्‍चात निकट परिजन की सहमति होने पर आर्इ बैंक को सूचित किया जाता है। आर्इ बैंक के नंबर पर किसी भी समय संपर्क किया जा सकता है। कार्निया को मृत्यु के 6 घंटे के भीतर निकाल लेना चाहिए, इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि मृतक के निकट संबंधी जितनी जल्दी हो सके निकट के आर्इ बैंक से संपर्क करे।

आर्इ बैंक से टीम आने में 1-2 घंटे का समय (दूरी पर निर्भर) लग सकता है। आर्इ बैंक को फोन करते समय पता एवं टेलीफोन नंबर सही – सही बताये, घर तक पहुंचने का रास्ता और आस-पास किसी बड़ी इमारत या विषिश्ट स्थल के बारे में भी जानकारी दे। ताकि आर्इ बैंक की टीम जल्दी पहुंच सकें। मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार रखें। नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरा करने में आर्इ बैंक को सहयोग करें।

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कार्निया निकालने की प्रक्रिया लगभग 15 मिनट में हो जाती है। कार्निया के साथ – साथ उस व्यकित के शरीर से खून का नमूना भी लिया जाता है।

कार्निया की उपयोगिता बनाये रखने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें।

  • मृतक की आँखें बंद कर दें एवं उन पर नर्म रूर्इ के फाएं रखें।
  • सिर के नीचे दो तकिए लगाकर सिर को ऊंचा कर दें।
  • छत पर लगे पंखों को बंद कर दें।
  • आस-पास गर्मी और गंदगी न होने दें।

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

  • आँखों का दान सिर्फ मृत्यु के बाद ही किया जा सकता है।
  • मृत्यु के 6 घंटे के भीतर हो जाना चाहिए
  • केवल पंजीकृत चिकित्सकों द्वारा ही नेत्रदान करवाया जा सकता है।
  • नेत्रदान की प्रक्रिया में 15 से 20 मिनट का समय लगता है।
  • नेत्रदान के लिए मृतक को कहीं ले जाने की जरूरत नहीं होती, अस्‍पताल  या घर जहां भी है आर्इ बैंक की टीम वहां पहुंच जाती है।
  • नेत्रदान से मृतक का चेहरा खराब नहीं होता।
  • दानदाता और प्राप्तकर्ता दोनों की पहचान गुप्त रखी जाती है।

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