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कजरारी आंखों के बिना खूबसूरती के बारे सोचा नहीं जा सकता। इन आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए आप कई तरह के उपाय करते हैं। मौसम और फैशन के मुताबिक आंखों को स्‍टाइलिश बनाने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन क्‍या आपने कभी सोचा है कि ऐसा करने के चक्‍कर में आंखों की चमक धुंधली हो सकती है। कुछ सावधानियां हमें परेशानियों से बचा सकती हैं।

ऐसे में जब कुछ-कुछ महीनों में मौसम बदलता जाता है, तो क्‍यों न आप मेकअप के स्‍टाइल भी बदलते रहें। आर्टिफिशियल आइ लैशेज और कलर्ड आई लेंस में भी इसी तरह बदलाव करें। ले‍किन इन फैशनेबल चीजों का इस्‍तेमाल करने से पहले नेत्र कॉस्‍मेटिक्‍स से जुड़ी जरूरी बातें भी समझ लेनी चाहिए, ताकि आंखों की नई समस्‍या न झेलनी पड़े। आइए आगे हम चर्चा करते हैं, मस्‍कारा, काजल, आईशैडो और आइ लाइनर जैसे कॉ‍स्‍मेटिक्‍स का। अकसर इनलका उपयोग आखों को बेहद खूबसूरत बनाने के लिए आप करते रहते हैं। –

काजल –

काजल को लगाते समय खास तरह की सावधानी की जरूरत है। इसके पेंसिल को ज्‍यादा नुकीला न रखें। काजल में कार्बन पार्टिकल्‍स भी होते हैं। यह आखों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। इससे कंजेक्टिवाइटिस आई फ्लू और यहां तक कि कॉर्नियल अल्‍सर का खतरा रहता सकता है। सही इलाज न होने पर कॉर्नियल अल्‍सर के कारण आंख में बेहद ज्‍यादा सूजन और नेत्र रोशनी जाने की गंभीर परेशानी हो सकती है।

मस्‍कारा –

मस्‍कारा को महिलाएं पलकें घनी दिखने के लिए लगाती हैं। इसे ब्रश की सहायता से पलक की जड़ों के पास लगाया जाता है। मस्‍कारा के इस्‍तेमाल से इसमें मौजूद खास प्रकार के रसायन आंखों में एलर्जी की वजह बनते हैं। इसलिए जरूरी है कि मस्‍कारा लगाते समय यह आंख के अंदर न चला जाए। अगर गलती से ऐसा हो भी जाता है तो आप तुरंत आखों को साफ पानी से धोएं। यदि पलकों में खुजली या अन्‍य परेशानी महसूस हो, तब मस्‍कारा का उपयोग तुरंत बंद कर दें। खास बात ध्‍यान रखें कि 2-4 महीने बाद ही मस्‍कारा बदल देना चाहिए। वरना इसके अधिक समय तक इस्‍तेमाल करने से आंखों में इंफेक्‍शन की आशंका रहती है।

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आई शैडो

आई शैडो को पलकों और भौंह के बीच की त्‍वचा को चमकदार रंग देने के लिए लगाई जाती है। इसमें भी कई तरह के रसायन होते हैं। बार-बार इस्‍तेमाल से हो सकता है कि पलक पर एलर्जी और खुजली हो। ऐसे में आप तुरंत आई शैडो का उपयोग रोक दें।

आई लैशेज

कृत्रिम आई लैशेज का इस्‍तेमाल इन दिनों लड़कियों के लिए फैशन बन गया है। इससे आंखें ज्‍यादा खूबसूरत दिखने लगती हैं। लेकिन सबसे बड़ी सावधानी इन आई लैशेज को लगाने और निकालते समय बरतनी चाहिए। क्‍योंकि इसी समय कॉर्निया समेत आंख के कई हिस्‍से चोटिल हो सकते हैं।

आई लाइनर

गलत तरह से आई-लाइनर का प्रयोग करने से कंजेक्टिवाइटिस होने का खतरा होता है। यदि यह गलती बढ़ जाए तो कॉर्निया में भी घाव की आशंका हो जाती है। इसलिए आइ लाइनर लिक्विड के रूप में उपयोग करें या पेंसिल के रूप में, हमेशा सतर्ककता बरतें।

  • आंखों में खुजली होने पर हमेशा साफ कपड़े से आंखों को सहलाना चाहिए। यह ध्‍यान रखें कि कभी भी आंखों को हाथों से न रगड़ें।
  • हर दिन आखों में तीन से चार बार साफ पानी से छींटें दें।
  • तेज धूप में निकलने से पहले सन ग्‍लासेज जरूर पहनें। ऐसा करने से आंखें धूप के दुष्‍प्रभाव से बची रहती हैं।
  • सन ग्‍लासेज खरीदते समय कुछ सावधानी बरतना जरूरी है। कामचलाऊ चश्‍मा न खरीदें। क्‍योंकि ऐसे चश्‍मों में ग्‍लास घटिया किस्‍म का हो सकता। इससे आंखों को नुकसान होता है।
  • इसलिए अच्‍छी कंपनी का चश्‍मा खरीदने को कोशिश करें। इस वक्‍त फैशन में छोटे फ्रेम वाले चश्‍मों का प्रचलन है। लेकिन ध्‍यान रखें कि ऐसे चश्‍मे से आंख में जाने वाली धूल को रोकने में ज्‍यादा मदद नहीं मिलती है। यदि आखों में धूल चला जाता है, तो चश्‍मे बेतुका हो जाएगा।
  • चश्‍मा पहनने वाले फोटोक्रॉमिक लेंस लगवाएं, तो बेहतर होगा। इससे तेज धूप में चलने पर भी आखों को राहत रहती है।
  • गर्मी से यदि आखें लाल हों, तो इसमें ठंडेपानी के छींटे डालें और कुछ वक्‍त ठंडक में आखें बंद कर बैठें।
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इन सलाह को आजमाकर आप गर्मी और बरसात के इस मौसम में अपनी आखों का ख्‍याल रख सकते हैं। इससे आखों में तरोताजगी और चमक बरकरार रहेगी।

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